Cyber Sakhi: गांव की महिलाओं को साइबर ठगी से बचाएगी नई पहल, 2029 तक 10 लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य

2 सितंबर 2026 | टेक्नोलॉजी | डिजिटल इंडिया

देश में डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब गांवों की महिलाएं भी स्मार्टफोन और इंटरनेट के जरिए पैसे भेजने, ऑनलाइन खरीदारी, सरकारी सेवाओं और आजीविका से जुड़े काम करने लगी हैं। लेकिन डिजिटल इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी का खतरा भी बढ़ा है।

इसी चुनौती को देखते हुए Reliance Foundation और C-DAC Hyderabad ने e-SafeHER नाम से एक नई साइबर सिक्योरिटी जागरूकता पहल शुरू की है। इसका लक्ष्य अगले तीन वर्षों में ग्रामीण भारत की 10 लाख महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। इस पहल के तहत महिलाओं को “Cyber Sakhi” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

Cyber Sakhi का मतलब ऐसी महिला से है जिसे साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल की जरूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि वह अपने आसपास की दूसरी महिलाओं को भी इसके बारे में जागरूक कर सके।

यानी यह केवल एक महिला को ट्रेनिंग देने तक सीमित नहीं है। एक प्रशिक्षित Cyber Sakhi अपने गांव और समुदाय की दूसरी महिलाओं को भी बता सकती है कि ऑनलाइन ठगी से कैसे बचना है, संदिग्ध लिंक की पहचान कैसे करनी है और डिजिटल पेमेंट करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

इसी peer-to-peer यानी महिला से महिला तक जागरूकता के मॉडल के जरिए इस अभियान को बड़े स्तर पर पहुंचाने की योजना है।

e-SafeHER का लक्ष्य तीन वर्षों में ग्रामीण भारत की 10 लाख महिलाओं तक पहुंचना है। इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और 2029 तक इसे बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है। शुरुआत मध्य प्रदेश और ओडिशा से की जा रही है।

इसके बाद दूसरे राज्यों में भी इसे विस्तार दिया जाएगा।

पहलजानकारी
कार्यक्रमe-SafeHER
मुख्य उद्देश्यसाइबर सुरक्षा जागरूकता
लक्ष्य10 लाख ग्रामीण महिलाएं
समय सीमा3 वर्ष
लक्ष्य वर्ष2029
शुरुआतमध्य प्रदेश और ओडिशा
तकनीकी भागीदारC-DAC Hyderabad
साझेदार संस्थाReliance Foundation
सरकारी कार्यक्रमMeitY का ISEA Programme
मुख्य मॉडलCommunity और Peer-led Training

आज डिजिटल दुनिया सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं UPI, मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी और दूसरी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।

लेकिन कई बार साइबर अपराधी इसी बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल का फायदा उठाते हैं।

उदाहरण के लिए किसी महिला को मैसेज मिल सकता है कि उसका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है और उसे तुरंत किसी लिंक पर क्लिक करना होगा। इसी तरह फर्जी KYC अपडेट, नकली कस्टमर केयर नंबर, OTP मांगने वाले फोन और फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जाता है।

ऐसे मामलों में अगर व्यक्ति को पहले से पता हो कि इस तरह के फ्रॉड कैसे होते हैं, तो वह ठगी का शिकार होने से बच सकता है।

इसीलिए e-SafeHER का फोकस केवल महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने पर नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करना सिखाने पर भी है।

इस पहल के तहत महिलाओं को साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाएगी। इसमें रोजमर्रा के डिजिटल इस्तेमाल में आने वाले साइबर जोखिमों को समझना और सुरक्षित व्यवहार अपनाना शामिल होगा।

महिलाओं को खास तौर पर इन बातों के बारे में जागरूक किया जा सकता है:

  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करना
  • OTP और पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करना
  • अनजान व्यक्ति को बैंकिंग जानकारी न देना
  • फर्जी KYC और बैंक अपडेट मैसेज की पहचान करना
  • फर्जी कस्टमर केयर नंबर से सावधान रहना
  • अनजान ऐप डाउनलोड करने से बचना
  • संदिग्ध ऑनलाइन पेमेंट रिक्वेस्ट को पहचानना
  • सोशल मीडिया पर निजी जानकारी शेयर करने में सावधानी रखना
  • ऑनलाइन अकाउंट को सुरक्षित रखने के तरीके समझना
  • साइबर फ्रॉड होने पर सही जगह शिकायत करना

इस तरह Cyber Sakhi अपने समुदाय में साइबर सुरक्षा की पहली जानकारी देने वाली स्थानीय मददगार बन सकती है।

e-SafeHER की एक खास बात यह है कि इसके लिए महिला Self-Help Groups (SHGs) का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

Reliance Foundation अपने जमीनी स्तर के नेटवर्क और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्लेटफॉर्म के जरिए इस कार्यक्रम को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाएगा। इससे साइबर सुरक्षा की जानकारी उन महिलाओं तक भी पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो किसी बड़े शहर या ट्रेनिंग सेंटर तक आसानी से नहीं पहुंच पातीं।

साइबर सिक्योरिटी जैसे विषयों को समझने में भाषा भी एक बड़ी भूमिका निभाती है।

इसी वजह से C-DAC Hyderabad इस कार्यक्रम के लिए ट्रेनिंग कंटेंट तैयार करने, उसे अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध कराने और समय के साथ उसे अपडेट करने का काम करेगा।

कार्यक्रम में स्थानीय भाषाओं, ऑडियो-विजुअल कंटेंट और blended learning जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा की जानकारी को ज्यादा आसान और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ना है।

इस पहल में दोनों संस्थाओं की अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं।

C-DAC Hyderabad इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY के तहत काम करने वाली संस्था है। यह e-SafeHER के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़े ट्रेनिंग कंटेंट को तैयार और स्थानीय स्तर के हिसाब से विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा।

वहीं Reliance Foundation अपने ग्रामीण और महिला सशक्तिकरण नेटवर्क के जरिए इस ट्रेनिंग को लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

यह पहल MeitY के Information Security Education and Awareness (ISEA) Programme के तहत संचालित की जा रही है।

e-SafeHER का एक बड़ा उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल दुनिया में ज्यादा आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाना भी है।

अगर किसी महिला को ऑनलाइन पेमेंट करने में डर लगता है या उसे यह समझ नहीं आता कि कोई मैसेज असली है या फर्जी, तो वह डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने से बच सकती है।

लेकिन अगर उसे साइबर फ्रॉड के सामान्य तरीकों की जानकारी हो, तो वह डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल ज्यादा आत्मविश्वास के साथ कर सकती है।

इसका असर बैंकिंग और पेमेंट से आगे भी जा सकता है। महिलाएं डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल आजीविका, शिक्षा, सरकारी सेवाओं और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए भी कर रही हैं।

इस पहल की सबसे खास बात इसका community-based model है।

आमतौर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान में किसी विशेषज्ञ द्वारा लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन Cyber Sakhi मॉडल में एक प्रशिक्षित महिला अपने आसपास की कई दूसरी महिलाओं तक जानकारी पहुंचा सकती है।

इसे इस तरह समझ सकते हैं:

Cyber Security Trainer → Cyber Sakhi → गांव की महिलाएं → पूरा समुदाय

इस मॉडल से साइबर सुरक्षा की जानकारी स्थानीय स्तर पर लगातार आगे बढ़ सकती है।

Cyber Sakhi पहल का उद्देश्य साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म करना नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को साइबर जोखिमों को पहचानने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए तैयार करना है।

किसी भी साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए जागरूकता के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, समय पर शिकायत और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई भी जरूरी है।

फिर भी, किसी व्यक्ति को ठगी के सामान्य तरीकों की पहले से जानकारी होना उसे कई मामलों में नुकसान से बचा सकता है।

भारत तेजी से डिजिटल हो रहा है। अब डिजिटल इंडिया का मतलब केवल लोगों को इंटरनेट और स्मार्टफोन उपलब्ध कराना नहीं है।

लोगों को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाना भी उतना ही जरूरी है।

Cyber Sakhi जैसी पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए। अगर 10 लाख महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी मिलती है और वे अपने परिवार तथा समुदाय की दूसरी महिलाओं को भी जागरूक करती हैं, तो इसका असर काफी बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है।

आज के समय में OTP, UPI, बैंकिंग ऐप और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह जानना भी है कि इनका सुरक्षित इस्तेमाल कैसे किया जाए।

e-SafeHER की असली सफलता इस बात से तय होगी कि ट्रेनिंग लेने वाली महिलाएं अपनी रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी में इन बातों को कितना अपनाती हैं।

डिजिटल रूप से जुड़ना पहला कदम है। डिजिटल रूप से सुरक्षित रहना अगला कदम है।


  1. e-SafeHER एक साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम है।
  2. इसका लक्ष्य 10 लाख ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचना है।
  3. यह लक्ष्य 2029 तक हासिल करने की योजना है।
  4. शुरुआत मध्य प्रदेश और ओडिशा से की जा रही है।
  5. प्रशिक्षित महिलाओं को Cyber Sakhi के रूप में तैयार किया जाएगा।
  6. C-DAC Hyderabad ट्रेनिंग कंटेंट और उसके localisation में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
  7. Reliance Foundation ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर महिला Self-Help Groups के जरिए, अभियान को आगे बढ़ाएगा।